हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार,सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह सय्यद मुजतबा हुसैनी ख़ामेनेई ने हज़रत ज़ैनब सलामुल्लाह अलैहा के यौमे विलादत और नर्स दिवस के अवसर पर अपने संदेश में ईरानी राष्ट्र के अभूतपूर्व जागरण के दौर में इस्लामी गणराज्य ईरान की ज़ैनबी महिलाओं और बेटियों की भूमिका की सराहना की। उन्होंने नर्सों की जीवनदायी और आशा जगाने वाली भूमिका तथा समाज के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा पर उनके महत्वपूर्ण प्रभावों का उल्लेख करते हुए स्वास्थ्य क्षेत्र के अधिकारियों से नर्सों पर विशेष ध्यान देने का आग्रह किया।
इस्लामी क्रांति के सर्वोच्च नेता का संदेश निम्नलिखित है:
बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम
हर वर्ष पाँच जमादिउल अव्वल उस महान महिला के शुभ जन्म की याद दिलाता है, जिन्होंने पाँच पाक हस्तियों (पंजतन पाक), सलवातुल्लाह व सलामुहू अलैहा व अलैहिम, की मोहब्बत, परवरिश और संगत में प्रशिक्षण प्राप्त किया। ये हस्तियाँ अल्लाह की सर्वश्रेष्ठ रचनाओं में शामिल हैं। पचास वर्षों से अधिक समय तक इस प्रकाशमय शिक्षालय में हज़रत ज़ैनब कुबरा सलामुल्लाह अलैहा की परवरिश और प्रशिक्षण ने इस युग-युग की चमकती हुई हस्ती में सम्मान और श्रेष्ठता के ऐसे विविध गुण पैदा किए कि वह हमेशा से अल्लाह के प्रिय बंदों के लिए प्रशंसा, सम्मान और गौरव का कारण रही हैं। उनकी महानता अपने शिखर पर आशूरा की घटना में दिखाई दी। एक ओर कर्बला के مظलूमों के प्रति असीम प्रेम, करुणा, शुभचिंता और धैर्य के साथ दुख में सहभागी होने का उदाहरण सामने आया, तो दूसरी ओर दृढ़ता और साहस की सर्वोच्च मिसाल भी देखने को मिली।
इस्लामी आंदोलन और इस्लामी क्रांति का इतिहास शुरू से ही ईरान की ज़ैनबी महिलाओं और बेटियों की सक्रिय भागीदारी के दृश्यों से भरा रहा है। ईरानी राष्ट्र के अभूतपूर्व जागरण के इस दौर में, जो तीसरे पवित्र प्रतिरक्षा युद्ध के दौरान सामने आया, यह भूमिका और भी आश्चर्यजनक तथा व्यापक हो गई। आज इस्लामी गणराज्य ईरान की ज़ैनबी महिलाएँ विभिन्न क्षेत्रों में, विशेषकर शहरों और ग्रामीण इलाकों के चौराहों तथा जनसभाओं में सक्रिय उपस्थिति के साथ, युद्ध के मोर्चों के पीछे जागरूकता और प्रतिरोध की अग्रणी भूमिका निभा रही हैं। उनकी इस विशाल भागीदारी के सामने समय के अत्याचारी शासक, जो हमेशा इस राष्ट्र को पीड़ा पहुँचाने और उसे कुचलने के प्रयास में रहते हैं, उनका सामना करने का साहस नहीं जुटा पाते।
हज़रत ज़ैनब कुबरा की विलादत के दिन को इस भूमि के लोगों ने, जो अहलेबैत-ए-अतहार सलवातुल्लाह व सलामुहू अलैहिम अजमईन से गहरा प्रेम और श्रद्धा रखते हैं, दुखी इंसानों के प्रति दया, हमदर्दी और उनके लिए त्याग की भावना को ध्यान में रखते हुए उचित रूप से नर्सों को सम्मान देने के दिन के रूप में चुना है। इसका कारण यह है कि इन महान हस्तियों के अनेक नैतिक गुण और मानवीय मूल्य मेहनती तथा सम्माननीय नर्सों के जीवन में स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं।
नर्स की भूमिका डॉक्टरों, शिक्षकों, प्रशिक्षकों, विद्वानों और राहतकर्मियों जैसे अन्य क्षेत्रों से जुड़े लोगों की तरह जीवनदायी और आशा जगाने वाली है। इसी कारण कभी-कभी नर्स को रहमत के फरिश्ते के रूप में देखा जाता है। ऐसा तब होता है, जब वह दर्द और बीमारी से जूझ रहे लोगों के गुस्से और बेचैनी के बावजूद उन्हें सुकून, आशा, स्वास्थ्य लाभ और उपचार की सुविधाएँ उपलब्ध कराती है तथा इस प्रकार अल्लाह की रहमत के उतरने का मार्ग प्रशस्त करती है।
हालाँकि, मरीजों की देखभाल में नर्सों की भूमिका डॉक्टरों की तुलना में लगातार, सक्रिय और धैर्यपूर्ण उपस्थिति की माँग करती है। इस निरंतर उपस्थिति का प्रभाव केवल शारीरिक स्वास्थ्य तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह मानसिक और आध्यात्मिक पीड़ाओं पर मरहम भी बनती है और कई अवसरों पर निराशा को हावी होने से रोकती है। इसी तरह नर्सें अपनी हमदर्दी भरी सेवा के माध्यम से ऐसे कार्य भी करती हैं, जिन्हें डॉक्टरों के लिए कर पाना संभव नहीं होता।
आज ऐसे समय में, जब साम्राज्यवाद का दुष्ट तंत्र स्वतंत्रता और प्रतिरोध में विश्वास रखने वाले राष्ट्रों, विशेषकर ईरानी राष्ट्र पर तरह-तरह के अत्याचार और अपराध करने से पीछे नहीं हट रहा है तथा उपचार और दवाओं से संबंधित विभिन्न प्रतिबंध लगाकर भी इस महान राष्ट्र की कठिनाइयाँ बढ़ाना चाहता है, नर्सों पर ध्यान देना, नर्स समुदाय को मजबूत बनाना तथा उनके ज्ञान, कौशल, क्षमता, उत्साह, समर्पण और गरिमा को बनाए रखने और बेहतर बनाने का प्रयास करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। विशेष रूप से उन नर्सों के लिए, जिन्होंने स्वयं को गैर-सरकारी संस्थानों में सेवा के लिए समर्पित कर रखा है। इन प्रयासों का समाज के शारीरिक और आध्यात्मिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है।
इसलिए अपेक्षा की जाती है कि स्वास्थ्य क्षेत्र के अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए इन महत्वपूर्ण विषयों को प्राथमिकता देंगे।
मैं इन दोनों अवसरों पर अपने प्रिय राष्ट्र, इस्लामी मातृभूमि की कर्तव्यनिष्ठ और दृढ़ संकल्प वाली महिलाओं तथा विशेष रूप से नर्स बहनों और भाइयों को हार्दिक बधाई देता हूँ।
अंत में, मैं नर्स समुदाय के उन مظलूम और बलिदानी शहीदों के लिए अल्लाह की रहमत की दुआ करता हूँ, जिन्होंने विशेष रूप से दूसरे और तीसरे थोपे गए युद्धों तथा जनवरी 2026 के उपद्रवों और दंगों के दौरान अपनी जान कुर्बान की। मुझे आशा है कि हमारे स्वामी इमाम महदी अज्जलल्लाहु तआला फरजहुश्शरीफ की दुआओं के सदके में अल्लाह तआला ईरानी राष्ट्र को और अधिक सम्मान, शक्ति तथा वे सभी गुण प्रदान करेगा, जो हज़रत ज़ैनब सलामुल्लाह अलैहा के शिक्षालय का अनुसरण करने के योग्य हैं।
सैयद मुजतबा हुसैनी ख़ामेनेई
16 अक्टूबर 2026
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